योग साधना

सिद्ध योग साधना ( हृषि परंपरा अनुसार )


योग की मूल कथाये - 

 

योग इतनी गंभीर रहस्य हे जो नातो किसी एक किताब में बर्णन किया जायगा और नहीं इस वेबसाइट में बर्णन हो सकेगा, फिर भी हम जितनी सरलता से इसका खुलासा किया जाय उसके ख़याल रखते हुए ईस योग का महा रहस्य का उद्घाटन करूँगा .

योग का सम्बन्ध हमलोग की सरीर मन और आत्मा से जुड़ा हुआ हे . और योग ओनेक क्रिया से पूरा होता हे जैसे आसन, प्राणायाम, ध्यान, धारणा और समाधि से पूरा होता हे कुण्डलिनी को जागृत करते हुए, योग के ओनेक प्रकार हे जैसे राजयोग, हठयोग, क्रियायोग, ध्यानयोग, त्राटकयोग और मंत्रयोग

भारतीय योग साधना की कुछ गुप्त रीती जो की सिर्फ गुरु शिष्य परंपरा से चलते आ रहे हे हृषि कुल की समाप्तिक्षण में  वह आज मैंने आप के सामने उजागर करूँगा कुल की गरिमा को बनाये रखने के लिए जो की आज अपनी आखरी स्वास ले रहा हे

 

योग की उत्पत्ति - 

 

योग शास्त्र की रचना देवो का देव महादेव से ही हुई हे और महादेव से माता पारबती को और फिर बिष्णुजी और ब्रह्माजी को प्राप्त हुआ और फिर हृषि कुल को यह ज्ञान प्राप्त हुआ और गुरु शिष्य की परंपरा से आज कुछ चाँद लोग हे जिस को ईस ज्ञान का गुह्य रहस्य का पूरा ज्ञान भंडार का ज्ञान प्राप्त हे, मगर समाज की फरेब बाज़ी से और फर्जी गुरुओ का प्रभाब से आज भी ईस ज्ञान का खुलासा नही हो पाया और गुप्त बिद्या होने की कारन जोग्य शिष्य को ही यह ज्ञान दिया जाता .....
मगर कलि युग में ऐसा गुरु कहा हे ???? जिस का पास यह अमोघ ज्ञान का पूरा भंडार हो ... ईस लिए हम सिद्ध हृषि कुल की तरफ से यह गुप्त बिद्या का फिर से  खुलासा करने का एक प्रयास गुरु की आदेश से .... 

 

 

महादेव से सुरु हुआ यह सिद्ध हृषि कुल और फिर ओनेक हृषिओ, ६४ सिद्ध और नबनाथ से यह परंपरा चलते हुए आज हमारा यह सिद्ध हृषि कुल का कुल सिरोमनि योगी सम्राट कुलधक्ष श्री महायोगी धर्मा महाराज जी अपनी महागुरु की आदेश से यह गुप्त बिद्या आप सब का सामने फिर एकबार उजागर करेगा सनातन हिन्दू जाती और बिस्व कल्याण की हेतु  ...

 

 

 

योग साधना की कुछ गुह्य बाते -  

 

योग साधना की मूल आधार हे यम, नियम, आसन,धौत, प्राणायाम, ध्यान, धारणा, समाधि 

* यम -

* नियम -

* आसन -

* धौति -

* प्राणायाम -

* कुण्डलिनी ब चक्र  साधना -

* त्राटक साधना - 

 

 

रोजाना नियमित अभ्यास से धीरे धीरे हमारा अभ्यंतरीन परिबर्तन सुरु हो जाता हे .... 

 

योग्य गुरु की सानिध्य में रह के ही योग साधना की गुप्त रहस्य को प्राप्त किया जा सकता हे ....... किउ की किताब पड़के, किसीसे सुनके, तस्बिर और प्रणाली देख के योग न तो कभी प्राप्त किया गया हे और न किया जायगा I

इसलिए अगर आप को योग प्राणायाम और कुण्डलिनी साधना की इच्छा हो तो हम से संपर्क करे 

 

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